इश्क के खेल
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इश्क के खेल में मुझे माहिर न कहो,
जो भी समझो लाज़मी
दो सजा,,,
मगर काफ़िर न कहो।
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गगन टांकड़ा
(03।05।19)
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इश्क के खेल में मुझे माहिर न कहो,
जो भी समझो लाज़मी
दो सजा,,,
मगर काफ़िर न कहो।
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गगन टांकड़ा
(03।05।19)
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