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Wednesday, December 4, 2019

वो याद बचपन


वो याद बचपन
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किसी भी बात पर ठहाके लगाना छोड़ दिया।

वो छत पर जाकर बारिशों में नहाना छोड़ दिया।

छोड़ दिया भरी धूप में पेडों के नीचे मिट्टि से खेलना ।

 छोड़ दिया अब यारो को पीछे से आकर धकेलना।

मगर नहीं छुटी वो याद बचपन की।

घरवालों से छुपकर जागी वो रात बचपन की।

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गगन टांकड़ा
(28।04।17)

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