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Sunday, January 5, 2020

जबतक

जबतक
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जबतक जिंदगी तेरी इनायत से सराबोर थी। 
   न तो कोई फ़िक्र थी न ही कोई दर था। 
जिंदगी का हर लम्हा खुशियों से सजा था।  
   जब भी देखता तेरी निगाहों को हर उस पल को भूल जाता था। 
तेरी हर बात मेरे दिल की गहराईयों तक पहुँचती थी। 
    कोई पल न था जब तू ना याद आता था। 
कुछ दिनों की दुरी भी बर्दाश्त न होती थी। 
                आखिर 
    आखिर ये मंजर बदल क्यों गया। 
लगता है ........ तूफ़ान में सबकुछ उजड़ गया। 
    बेचैनी है निगाहों में कुछ तीस सी दिल में है। 

                                  मगर 
मगर फिर भी में सोचता हूँ ,,,,,
     कि जीवन तो जीना ही है 
तो फिर क्यों इसे गम में बर्बाद करूँ 
     तू नहीं तो क्या हुआ तेरी यादों से ही इसे आबाद करूं 

                               अब 
अब जिस ओर निगाह करता हूँ बीएस तुझको ही मैं  पाता हूँ 
तेरे उस प्यार में फिरसे खुदको सराबोर पता हूँ। 



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गगन टांकड़ा 
{१४/०२/१५}

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