तेरे नाम
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जलन बढ़ती है जब जिगर में,
आहिस्ता से इस दिल को सहला लेता हूँ,
कुछ इस तरह से जलते अरमानों के बीच से मैं
तेरे नाम को बचा लेता हूँ।
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(२६/०२/२०२०)
गगन टांकड़ा
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जलन बढ़ती है जब जिगर में,
आहिस्ता से इस दिल को सहला लेता हूँ,
कुछ इस तरह से जलते अरमानों के बीच से मैं
तेरे नाम को बचा लेता हूँ।
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(२६/०२/२०२०)
गगन टांकड़ा
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