तेरे नरम होंठो की सुरखाई
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तेरे नरम होंठो की सुरखाई को परखने का मन करता है
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तेरे नरम होंठो की सुरखाई को परखने का मन करता है
मचलते अरमानों से भरे तेरे नमकीन जिस्म को
चखने का मन करता है।
फिसल ना जाए कहीं ये अरमान रेत की तरह
इन हाथों से
इसलिए जब भी मिला तू
तुझे भरके बाजुओं में ता-उम्र सोने का मन करता है।
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गगन टांकड़ा
(२४-०९-२०१६)
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