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Monday, April 20, 2020

तेरे नरम होंठो की सुरखाई

तेरे नरम होंठो की सुरखाई
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तेरे नरम होंठो की सुरखाई को परखने का मन करता है 

मचलते अरमानों से भरे तेरे नमकीन जिस्म को 
 चखने का मन करता है। 

फिसल ना जाए कहीं ये अरमान रेत की तरह 
इन हाथों से 

इसलिए जब भी मिला तू 
तुझे भरके बाजुओं में ता-उम्र  सोने का मन करता है। 

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गगन टांकड़ा 
(२४-०९-२०१६)

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