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Saturday, April 18, 2020

गर निगाहों से प्यार बयां होता


गर निगाहों से प्यार बयां होता 
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गर निगाहों से प्यार बयां होता 
तो शक है मुझे कि ,उसमें झूठ कई दफ़ा होता। 

गर निगाहों से प्यार बयां होता 
तो शक है मुझे कि ,उसमें झूठ कई दफ़ा होता। 

सच्चे इश्क़ की बातें तो दिल ही जानता  है 
जिसे सीने से लगके धड़कनों की जुबानी ही सुना जाता है। 

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गगन टांकड़ा 
(२४-०९-१६)

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