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Friday, April 17, 2020

ये सोचता था मैं


ये सोचता था मैं
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ये सोचता था मैं  की ,,,,,,,,

मेरे दिल के किसी कौने में दफन हो तुम 

कुछ बूंदे क्या बरसीं 
कुछ फ़िज़ा क्या बहकी 

फिर से याद आने लगे हो तुम।।

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गगन टांकड़ा 
(२४-०९-१६)

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