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Sunday, May 3, 2020

रफू कर भी लूं


रफू कर भी लूं 
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रफू कर भी लूं जिंदगी की उधड़ी चादर को। 
पर चाहकर भी तुझसा कोई रंग नहीं मिलता।।
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गगन टांकड़ा
(०८-०४-१७)

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