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Friday, January 22, 2021

जो सोचना है , सोच लीजिए 

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जो सोचना है , सोच लीजिए 

जो चाहे कह लीजिए। 

गर फिर भी दिल ना भरे 

जी चाहे जितना हमें 

उतना कोस लीजिए।

मैं आज हूँ तो शिकवे हैं

तुम कल हो मेरे। 

मैं भला बुरा क्यूँ मानूँ।।


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गगन टांकड़ा 

(२३-०१-२१ )

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