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Thursday, October 10, 2019

वहम का देवता

वहम का देवता 

* अगर दुनिया में तेतीस करोड़ देवता है 
तो चौतीस करोड़वां है  "वहम "

* अगर दुनिया में तेतीस करोड़ देवता है 
तो चौतीस करोड़वां है  "वहम "

*भाई साहब इस वहम ने अच्छे अच्छों को निचोड़ रखा है 
तभी तो बड़े बुजुर्गों ने इसे  छोड़ रखा है 

*कुछ बुद्धिजीवी नहीं मानेंगे, शक करेंगे मेरी बातों पर 
छोड़िये उन्हें,बस आप गौर कीजिए मेरे जज्बातों पर 

*इसकी (वहम  के देवता )हरकतें कुछ उटपटांग रहती है 
जिससे प्रसन्न  रहता है ,,,,, उसके सरपर आशीर्वाद रुपी टांग  रहती है 

*जिस पर भी इसकी मेहरबानियों का परछाया रहता है 
सच मानिये हर दम सकुचा घबराया सा  रहता है  

*चौबीसों घंटे सातो दिन वो अजीब ही ख्यालों में रहता है 
गलती चाहे खुदकी हो, किसी और को ही इल्जाम देता है 

*बच्चा कम नंबर आने का कारण 
मास्टर जी की उनकी बीवी से लड़ाई समझता है 

माली। ... 
*जरूर बुरा साया हे तभी यहाँ पेड़ नहीं पनपता है 

*बिल्ली के रास्ता काटने पर बड़ा व्यपारी  भी रास्ता बदल लेता है 

*बहु हर मजाक में भी चिढ़ने  की वजह  ढूंढ  ही लेती है 
चुप नहीं होती जबतक रो-रो कर ननद को नाम नहीं धर लेती है 

*काल,समय,घडी,शूल,में दुनिया अटकी है 
उपाय होजाए हर दोष का इसलिए कहाँ कहाँ नहीं भटकी है 

*गिलास का गिरना ,दूध का उफनना 
काँचका टूटना,बिजली का कड़कना 
ये सब भक्तों की दुनिया हिलाने के लिए काफी है 

*छींक आना ,जीभ का दांतों तले कट जाना ,
गालों की खाल अगर कट जाती है 
तो समझलो आस पास सभी की शामत आजाती है 

*मजबूर होजाता हे इंसान सोचने को जरूर इनमे से ही कोई गाली देता होगा 
और जबतक किसी पर न लगाले इल्जाम ,देवता चैन नहीं पड़ने देता होगा 

*अगर कोई समझाए इन्हे कि,इन फ़ालतू के चक्करों में क्यूँ  पड़ा है 
लपक कर देता है जवाब की मेरा "भगवान् बहुत बड़ा है" 
और वहम में भूल जाता है कि सामने कौन खड़ा है 

अच्छा जिन लोगों से यर रुष्ठ रहता है 

*वो कैसा भी हो समय सब हंस  के सेहत है 
वेहमियत को छोड़ रिश्तों को एहमियत देता है 

*अपने आप को बड़ा नहीं तोलता है 
और खुदके नाम को ईश्वर से नहीं जोड़ता है 

*वो समझता हे खुदा नहीं हे इंसान बस माटी का पुतला है 
रिश्ता हो कोई भी कहीं का भी बस अपनों को अपना समझता है 

*वो समझता हे जो झुकता नहीं उन्हें भुगतना पड़ता है 
और अगर रिश्ते निभाने होतो झुकना पड़ता है 

*और कुछ  इस   तरह ये लोग अपना फर्ज निभाते हैं
 रिश्ता पास का हो या दूर का बस अपना कर्म करते जाते है 

*में जनता हूँ कुछ लोग पढ़कर इस कविता को 
मुझपर तोहमत लगाएंगे 
अपने आप को  पाक साफ़ बताएंगे 
और कहेंगे 
'वाह-जी वह '
*कब,कहाँ किया है कुछ ऐसा बेवजह इल्जाम लगाते हो 
हमारे बारे में वहम पाल कर बैठे हो ,और हमे ही वहमी  बताते हो 

*तो दोस्तों समझ आगयी होगी की क्यों मेने वहम को देवता कहा 
ये अपने भक्तो के दिमाग में डाल देता है  इतना की न जाने उन्होंने क्या क्या न सहा 


*सच कहता हूँ  इस वहम  के देवता से मेरी सदा दूरी ही रहे 
और इसके शिष्यों से मेरा पाला कभी  ना पड़े 

*अगर कोई वहम का पाला कभी मुझसे मिल जाएगा 
सच कहता हूँ 
जो बीवी से बचाकर रखा है दिमाग 
वो सारा का सारा फ्राई  करजाएगा 


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गगन टांकड़ा 
१५/०९/१९ 

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