कई बार लिखा
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कई बार लिखा
कई बार लिखूं
कई बार लिखुंगा
जब जब भी कसक उठेगी तुझे ही हर बार लिखुँगा
कई बार पढ़ा
कई बार पढूं
कई बार पढूंगा
जब जब भी सिसक उठेगी तेरे इश्क की किताब पढूंगा
कई बार गढ़ा
कई बार गढ़ूँ
कई बार गढ़ुँगा
जब जब भी ललक उठेगी तेरी तस्वीर को मेरे दिल में गढुँगा
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गगन टांकड़ा
(३१/१२/१६)
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