audio

C:\Users\VISHAL\Documents\Sound recordings

Wednesday, October 2, 2019

फिर भी न जाने क्युँ

शब्द जो ,,,, लिखे थे तेरे नाम के 
जला दिया उन पन्नो को........ 

तू बसा था जिन यादों में 
भुला दिया उन लम्हों को........ 


फिर भी न जाने क्युँ 
फिर भी न जाने क्युँ 


फिर भी न जाने क्युँ 
तुम कहीं आस पास लगते हो...

मेरे दिल  की गहराई में आज भी  तुम 
जगह ख़ास रखते हो। 
 

No comments:

Post a Comment