शब्द जो ,,,, लिखे थे तेरे नाम के
जला दिया उन पन्नो को........
तू बसा था जिन यादों में
भुला दिया उन लम्हों को........
फिर भी न जाने क्युँ
फिर भी न जाने क्युँ
फिर भी न जाने क्युँ
तुम कहीं आस पास लगते हो...
मेरे दिल की गहराई में आज भी तुम
जगह ख़ास रखते हो।
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