audio

C:\Users\VISHAL\Documents\Sound recordings

Tuesday, October 1, 2019

परछाई

१ 
एक उम्र गुजर गई है 
अपनी परछाइयों से जद्दोजेहद करते हुए 
बचपन था तो पकड़ते ते.. 
और अब पीछा छुड़ाना चाहते हे। 

************
२ 

ये परछाइयां भी अजीब होती है 
हरदम साथ चलती हैं 
मगर ठोकर लगने पर सम्हालती तक नहीं। 


************
३ 

अब तो मेरी परछाई मुझसे देगा कर गई 
हरदम साथ जो चलती थी 
अँधेरे में किनारा कर गई। 


                              *************
४ 

मेरी परछाई तेरे दिए जख्मों को 
 हर वक़्त हरा रखती है 

मेरी परछाई तेरे दिए जख्मों को 
 हर वक़्त हरा रखती है 

अबतो वक़्त और मौसम के साथ वो भी रंग बदलती है। 

No comments:

Post a Comment