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Saturday, September 28, 2019

यादें तेरी





अमर बेल सी यादें तेरी 
जितना आगे बढ़ता हूँ 
उतना जकड़ती हैं। 

रेत  की तरह यादें तेरी 
जितना मुट्ठी में कैद करता हूँ 
उतना ही  फिसलती है। 

आतिश-ऐ-आफताब सी यादें तेरी 
                     जितना छुपाता हूँ 
उतनी ही रोशन जहाँ करती है। 


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%%गगन टांकड़ा %%
(०३/०६/१५)

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