कभी किसी मोड़ पर जो मिल जाएं हम अगर
मुझपर नजरें ठहरा ना लेना
बढ़ जाना आगे,,,,,,,,,,
मुझसे अनजान बनकर
जानता हूँ ये आसान नहीं होगा
सोचती रहोगी गुजरे लम्हों को रात भर
अगली सुबह फिर भूल जाना उसे
सबकुछ बस एक सपना समझकर
"गगन टांकड़ा "
(२६/०८/१४)
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