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Saturday, September 28, 2019

क्युँ पंख दिए ....

क्युँ  पंख दिए मेरे मन को.... 
जो चाहकर भी उड़ ना सकूँ 

क्यों शब्द दिए मेरे लबों को.... 
जो खुलकर कुछ कह ना सकूँ 

कुछ आता नहीं समझ इन निगाहों को अब.... 
आंसू तो है 
 मगर चाहकर  भी इन्हे बहा न सकूँ...  


गगन टांकड़ा 
(१२/०८/१४)

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