एक मुकद्दमा दाखिल मेरे नाम करदो
-------------------------------------------------
"ऐतबार गर न हो मुझपर तुम बस इतना सा काम करदो,,
एक मुकद्दमा दाखिल मेरे नाम करदो,,,,
तुमसे मिलने का आखिर कोई रास्ता तो नजर आएगा,,,,,
अदालत में ही सही,,, कोई तो सुलह कराएगा,,,,
***
तुम भी होगे में भी वहीँ होऊंगा
तुम भी होगे में भी वहीँ होऊंगा
जी चाहे उतनी तोहमतें लगवादेना मुझपर
तुम बस मुझपे ये करम करदो,,,
एक मुकद्दमा दाखिल मेरे नाम करदो।
***
दिन रात अश्कों से मेरी आँख नम है,,
तुम साथ नहीँ हो ,बस बाकी ये सितम है
मेरा चैन भी तुम हो आराम भी तुम हो।
तुम जाके मेरा एक काम करदो
एक मुकदमा दाखिल मेरे नाम करदो।
***
मेरे लिए है मुश्किल तुम्हे भूल पाना,,,,
तुमने सिख लिया है अब नजरें फिराना,,
चाहो तो हाथों से मेरी सांसे बन्द करदो
तुम जाकर मेरा बस एक काम करदो
एक मुकद्दमा दाखिल मेरे नाम करदो
;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
गगन टाँकड़ा
(13/10/19)
No comments:
Post a Comment