किनारा
जबसे हमने तुजसे ,तेरी यादों से किनारा कर लिया है।
लगता है ऐसा
जैसे जेहन से लफ्जो ने किनारा कर लिया है।
मेरे दर्द की दास्ताँ बस तुम्ही तो थे
फिर भी
खुशियों से राब्ता हमने कर लिया है।
.......
गगन टांकड़ा
(०२_०९_१६)
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