तेरे नाम
चल अब हम वफ़ा का एक पैगाम लिखते हैं।
जिंदगी के हर लम्हे को तेरे नाम लिखते हैं।
क्यूँ टूटते हैं दिल कुछ रवायतों के नाम पर।
हो न पाओगे तुम इस दिल से जुदा .......
क्यूंकि तुम्हे ही हम अल्फाज में सुबहों_शाम लिखते हैं।
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गगन टांकड़ा
(०४_०९_१६)
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