जो जिंदगी जीता है उसे इंसान कहते हैं
जिंदगी से खेलने वालो को तो अक्सर हम सर्कस में पाते हैं
उस सर्कस में दोस्तों एक रिंगमास्टर होता है
जो अपने चाबुक के जोर पर सब कुछ करवाना चाहता है
और रिंगमास्टर को ये कभी नागवार नहीं होता कि कोई उसकी अनसुनी करे
इसलिए वो आँखे तरेड़ता है, चाबुक चलता है, चीखता है, चिल्लाता है.
और खुदको वहा का बादशाह समझता है,
लेकिन असल जिंदगी में रिंगमास्टर की कोई जरूरत ही नहीं होती
क्युकि वहाँ सब इंसान होते है, सुनते हैं समझते हैं, और क्या करना है और क्या नहीं इसबात का निर्णय
बिना चाबुक के डर के लेते हैं।
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