शरबती फिजाओं ने
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की जो हंस रहे थे दुनिया को दिखाने के लिए........
उन्हें फिर से बीते दर्द में तड़पाने के लिए उकसाया है।
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गगन टांकड़ा
(२४-०९-१६)
जीवन में कई बार ऐसा समय आता हे ,जब हम अपने मन की बातों को किसी के साथ साझा करना चाहते है,मगर कर नहीं पाते। ऐसे समय में दिल शब्दों को जज्बातों की भट्टी गलकर स्याही बनता हे ,और मन के पंख की कलम से उसे सपनों के कागज पर उकेर देता हे. ऐसे ही कुछ जज़्बात यहाँ बयां कर रहा हूँ कुछ मेरे हेे , कुछ अपनों के,तो कुछ समाज के. आशा करता हूँ मेरी इस कोशिश को आपका प्यार जरूर मिलेगा।
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