रजनी गंधा
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यह कहानी राजस्थान के एक गाँव की है , जो कि एक हँसता खेलता गाँव है।
गाँव के सरपंच रसूखदार शास्त्री परिवार से हैं ,ज्ञानी विद्वान हैं और पुराने विचारों के हैं
एक रात गाँव की महिला को प्रसव पीड़ा होती है, और वो एक बेटी को जन्म देती हैं।
लड़की दिखने में सुंदर है , मगर वह काली है। घर वाले उसकी कुंडली बनवाने शास्त्री जी के पास जाते हैं।
शास्त्री जी बच्ची को बड़े गौर से देखते हैं ,उसके मस्तक की रेखाओं को देखकर वो कुछ गड़ना करने लगते हैं, ऐसा लगने लगता है जैसे वह किसी असमंजस में हो। अपनी गड़नाए पूरी करने के बाद वह गंभीर मुद्रा में आजाते हैं और बताते हैं की यह लड़की विनाश का साक्षात् रूप है।
यह पूरे गाँव के लिए विपत्ति का कारण बन सकती है, इसलिए इसका मरना ही उचित है, माँ बाप परेशां हो जाते है , घबरा जाते हैं रोने लगे हैं और शास्त्री जी से कोई उपाय निकालने के लिए कहते हैं।
शास्त्री जी सोचते हैं ,फिर बोलते हैं हाँ एक काम किया जा सकता है , इसे गाँव की सीमा से दूर ले जाया जाए , इसको इसकी शक्ल किसी को भी दिखाने की इजाजत नहीं है ,और जब ये थोड़ी बड़ी होजाए तो आने-जाने वालों को झरोखे से पानी पिलाया करे। इसे कभी गाँव के भीतर आने की इजाजत नहीं होगी।
मुखिया के आदेश का पालन हुआ , गाँव की सिमा के बहार झोपडी बना वो लोग रहने लगे।
समय बीता लड़की बड़ी हुई गाँव की शक्ल देखे हुए। वह १९ साल की हो चुकी थी , बहुत ही सुन्दर नैन-नक्श थे उसके ,उसका रूप ऐसा था की कोई भी उस मोह पाश में जकड जाए , लेकिन वो हमेशा चेहरा ढके ही रहती थी।
इन बीते वर्षों में गाँव ने भी खूब उन्नति कर ली थी , खुशहाली गाँव के हर घर में बस्ती थी।
सरपंच का एक लड़का था ,उसका बड़ा ही प्यारा नाम था "मनु " , मनु पढ़ने के लिए बाहर गया हुआ था। उसकी शिक्षा अब पूरी हो चुकी थी और वह अब वापिस गाँव के लिए आ रहा था , लेकिन उसने यह बात किसी को नहीं बताई सोचा सबको आश्चर्य हो जाएगा उसे देख कर। इसलिए मनु बिना बताए ही गाँव निकल लिया ,स्टेशन आकर उसने तांगा किया जो उसके गाँव से तीन किलोमीटर पहले बने कसबे तक छोड़ देने वाला था , लेकिन उससे आगे कोई जाने को तैयार न था क्यूंकि आगे का रास्ता उबड़-खाबड़ और रेतीला था, इतना अंदर गाँव में कोई नहीं जाता था।
तांगे ने उसे कसबे में छोड़ दिया जहाँ से आगे उसे अब अकेले ही जाना था।
वह सड़क किनारे बानी एक दुकान की कुर्सी पर बैठ गया , कचौरी चाय का नाश्ता कर ,घड़े से पानी पी लिया। और फिर अपनी मंजिल की ओर चल पड़ा , सर पर धूंप ,रेतीला रास्ता, और हाथ में बैग ,वो धीरे धीरे चल रहा था ,और अपनी बेवकूफी पर हंस रहा था।
सोच रहा था अगर बता देता की आ रहा हूँ तो पिताजी गांव से ही तांगा भिजवा देते ,यूँ गर्मी में तो नहीं मरना पड़ता,क्या पड़ी थी सबको चौंका देने की मुझे न जाने।
उसके गाँव की सीमा आ गयी वो थोड़ा खुश हुआ, लेकिन वो प्यास से तरस चूका था। उसने गाँव के बाहर बनी एक झोंपड़ी देखी , जहाँ उसे प्याऊ बना दिखा, उसने तुरंत प्याऊ की तरफ दौड़ लगाईं और पानी पिया। पानी पिने के बाद उसे कुछ अजीब महसूस हुआ और वो बेहोश हो गया।
इतनी गर्मी की वजह से उसे चक्कर आ गए थे। वह जमीं पर गिरा , बहार हुई आवाज को सुन मोहिनी बाहर निकली, उसने तुरंत मनु के मुहं पर पानी छिड़का, मनु कुछ होश में आया तो मोहिनी ने उसे अंदर चल कर बैठने के लिये कहा। मनु जैसे तैसे सम्हल कर अंदर गया और फिर अंदर बिछी खाट पर जा गिरा , धुप ने उसे निढाल कर दिया था।
कुछ देर बाद मनु को होश आया वो हिला उसे देख मोहिनी उठ खड़ी हुई और थोड़ा सा पानी लेकर मनु की और आई , मनु ने आंख खुलते ही उसकी और देखा और देखता ही रह गया , उसके मोहक चेहरे को देख वो बिलकुल स्तब्ध रह गया और थोड़ी देर उसे ही देखता रहा मानों उसपर वशीकरण हो गया हो, उसने मोहिनी के हाथ से पानी पिया, बैठा ,लेकिन उसे ही देखता रहा एकटक , मोहिनी की समझ में नहीं आ रहा था ये सब क्या है।
उसने पूछा आपकी तबियत ठीक है,कौन हैं आप ,और यहाँ कहाँ से आ रहे थे,
मनु कुछ देर रुककर बोला मैं मनु काम से यहां आया हूँ तुम कोण हो और यहाँ क्या कर रही हो?
मोहिनी ने अपने बारे में भी बताया ,की उसे गाँव में जाने की इजाजत नहीं है, उसको यहां पानी पिलाने का ही हुक्म है , इसलिए उसके माँ-बाप ने यहाँ झोपडी बना ली, आजकल खेतों में काम ज्यादा है तो दोनों वही खेतो पर रहे हैं, एक दो दिन में आते हैं।
मनु सब सुन रहा था ,काफी देर हो चुकी थी वो अब घर जाने के लिए उठा और ,अपने घर की तरफ चला।
जब वो घर पहुंचा तो हर कोई दंग रह गया , पूरे घर में खुशीओं की लहर उठ गयी। सबने खाना खाया और सोने के लिए चले गए , मनु को नींद नहीं आरही थी उसके चेहरे के आगे बार बार बस वही मनमोहक चेहरा आ रहा था , नींद आ भी गई तो ख्यालों में भी बस मोहिनी दिखाई दे रही थी रजनीगंधा के फूलों के साथ। वो लपक कर बैठ गया और सोचने लगा उसके साथ ये क्यू हो रहा है।
वह चाहकर भी उसके अपने दिमाग से नहीं निकल पा रहा था। सोते जागते बस मोहिनी के पास जाने का उसका मन कारने लगा।
एक दिन उसने मन बना लिया कि वो वापिस वहाँ जाएगा। सुबह गाँव देखने के बहाने वो निकला और उसकी झोपडी के पास पहुंच गया , पानी पिने के लिए झरोखे के पास आया। मोहिनी ने उसे पानी पिलाया ,वह बोला पहचानी मुझे , मैं वही हूँ जो उस दिन बेहोश हो गया था। वो बोली अच्छा अब आप ठीक हैं। यहाँ कैसे आए।
मनु बोला गुजर रहा था प्यास लगी तह तो बस आ गया। सुनो मुझे कुछ बात करनी है तुमसे क्या मैं अंदर आ सकता हूँ।
मोहिनी बोली मुझसे बात करनी है। कैसी बात ,मनु बोलै अंदर तो आने दो तभी बताऊंगा।
मोहिनी ने दरवाजा खोल दिया , उसने अंदर आते ही मोहिनी को देखा और फिर एकटक उसी को निहारता रहा। मोहिनी ने कई बार पूछा क्या काम है , वह नहीं बोला जब मोहिनी ने उसको हल्का सा हड़का कर पूछा तो वो बस इतना बोला "प्यास लगी थी बुझाने आगया "
मोहिनी बोली तो ये बात अंदर आकर करनी थी पानी तो पीला दिया मेने , मनु ने हिम्मत जुटाई और बोला पानी की प्यास नहीं ,तुम्हे देखने की प्यास,मैनें जिस दिन से तुम्हे देखा है , तुम्हारे ही ख्यालों में खोया रहता हूँ ,आज रहा ही नहीं गया तो तुम्हे देखने चला आया। देखो मुझे गलत मत समझना मैं पूरी रात तुम्हारे ही सपने देखता हूँ ,रजनीगंधा के फूल हाथों में लिए।
मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। मोहिनी को कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे ,इस तरह की बातें आजतक उससे किसी ने नहीं की थीं। वह तुनक कर बोली जाओ यहाँ से , मुझे इन लपेटो मे ना लो।
मनु चला गया लेकिन उसका मन नहीं माना वह किसी न किसी तरह रोज पानी पीने जाता और मोहिनी को मनाता। और मोहिनी रोज उसे बैरंग लौटा देती और उसे अपना चेहरा भी ना दिखाती जिससे मनु व्याकुल हो गया।
एक दिन उसने ठान लिया आज तो वो मोहिनी को मना कर ही रहेगा। कुछ दिन के लिए पडोस के गाँव में दोस्त से मिलने की कहकर मनु घर से निकला और सीधे प्याऊ पर जा पहुंचा और मोहिनी से बोला अगर आज तुमने हाँ नहीं की तो यहीं भूक प्यास से डैम तोड़ देगा।
और वो उसके झोपड़े के आगे बैठ गया दिन चढ़ने लगा गर्मी बढ़ने लगी हालात यह होगये की पानी भी भाप बन उड़ने लगा ,अब धूप मनु की सहन से बाहर हो गयी थी कुछ खाया पिया भी नहीं था , उसे चक्क्र आने लगे , और एक समय ऐसा भी आया जब वो बेसुध हो गिर पड़ा , उसके गिरने की आवाज आते ही मोहनी भागी और उसको गोद में लिटाकर पानी की छींट देने लगी , मनु को कुछ होश आया तो मोहिनी पानी पिने को कहा, मनु ने साफ इंकार करदिया और बोला अगर तुम मुझसे प्यार नहीं कारती तो क्यों आई , मरने दो मुझे वैसे भी तुम्हारे बगैर मैं नहीं जी सकता।
महिनी ने कहा अगर चाहती ना तो आती ही क्यूँ। अंदर आजाइये बाहर बहुत गर्मी है। मनु ने पानी पिया और अंदर आगया। अंदर आकर खाट पर बैठा और फिर लेट गया। मोहिनी , ने कुछ बनाया और इसे खाने के लिए कहा। मनु ने उसे अपने हाथों से खिलाने के लिए मना लिया। मोहिनी एक एक गस्सा खिलाती लेकिन मनु तो अपनी निगाहों की प्यास को बुझा रहा था। खाना ख़त्म होने तक वो महिनी को ही देखता रहा। खाना खाकर वो थोड़ी देर सुस्ताया और फिर मोहिनी से अपने मन की बातें करने लगा। मोहिनी भी उसकी बातों में खोने लगी थी। मनु ने मोका पाकर अपनी छुअन का एहसास मोहिनी को दिया , जिससे वो सिहर उठी , उसने मनु से ऐसा ना करने को कहा , मनु नहीं मना और उसने उसे अपनी बाजुओं में कैद कर लिया। मोहिनी अपने आप को समर्पित हो चुकी थी, मनु उसे पाने में सफल रहा।
रात हो चली थी , मोहिनी ने उसे घर वापिस जाने को कहा तो मनु ने बताया वह दो दिन के लिए बोलकर घर से निकला है। अबतो वह कल शाम को ही जाएगा। यह कहकर उसने फिरसे मोहिनी को बाजुओं में जकड़ लिया। सुबह हुई मनु को उसने घर में ही रहने को कहा अगर गाँव में से कोई देख लेगा तो उसकी बदनामी होगी। इस तरह से एक और दिन दोनों ने साथ बिताया।
रात्त हुई और मनु अपने घर की तरफ निकल लिया , उसने अपनी पहचान भी मोहिनी को बता दी थी। उसने जल्द आने का भी वदा किया।
समय ऐसे ही आगे बढ़ता रहा दोनों चोरी छिपे मिलते रहे, मनु की प्यास हर बार और बढ़ती जाती। उसने विचार कर लिया था की वह मौका पाते ही घरवालों से बात करलेगा और मोहिनी से शादी करेगा।
एक रोज वो मोहिनी के साथ झोंपड़े में था तभी मोहिनी के माँ बाप वहाँ आगये वह परिस्तिथि को समझ नहीं पाए और उन्होंने मनु से वहां से जाने को कहा और फिर कभी भी वहाँ मोहिनी से न मिलने को कहा , उन्होंने यह भी बता दिया की क्यूँ मोहिनी को गाँव से बाहर निकला गया वह शाप हे पूरे गाँव के लिये , लेकिन मनु कुछ समझने को राजी नहीं था। उसने अपनी माँ से बात की , माँ ने साफ साफ़ मना करदिया और बताया कि उसकी शादी की बात कहीं और से चल रहीं हैं , अब वो उस लड़की को भूल जाए तो अच्छा। मगर मनु सोते जागते बस मोहिनी के ही ख्वाब देखता। हाथ में रजनीगंधा के फूल लिए वह हमेशा उसकी प्यास को बढाती रहती लेकिन अब घर की बदनामी की वजह से वो मोहिनी से नहीं मिल पा रहा था।
एक रात मोहिनी सरपंच के घर आयी चुप-चाप उसने वहा काम करने वाले एक बच्चे से मनु को बुलाने के लिए कहा।
मनु दौड़ा दौड़ा आया और मोहिनी को बाँहों में भरकर चूमने लगा। मोहिनी ने उसे दूर किया और कहा मुझे सब पता लग गया है,तुम्हारी शादी किसी और से होने जा रही है ,मेरे पिता ने सब बताया और तुमसे मिलने को भी मना किया है। लेकिन एक बात जो मैं तुम्हे बताने आयी हूँ की मैं माँ बनाने वाली हूँ , मनु स्तब्ध था उसने अपनी तृष्णा को तृप्त करने में इस बात का कभी ख़याल ही नहीं किया। वह मोहिनी से बोला तुम कैसे भी इस बच्चे को गिरदो ताकि आगे का जीवन हम दोनों और हमारा परिवार बिना बदनामी के जी सके,यह कह कर वो अंदर चला गया।
मोहिनी पूरी तरह टूट चुकी थी , अँधेरी रात में उसने उसी कुँए में कूदकर जान देदी , जिससे वो पानी भरा करती थी। कुछ दिन बाद जब लोगों ने प्याऊ बंद पाया तो उसकी ढूंढ हुई , उसकी लाश कुएं में मिली। सबको यह बात पता लगी तो सबने इसे हादसा समझा,
लेकिन जब शास्त्री को पता लगा तो उसके होश ही उड़ गए ,उसे अपने गाँव का विनाश नजर आने लगा था ,जो भविष्यवाणी उसने की थी वह सच होने जा रही थी।
कुछ साल बीत गए थे। गाँव में सूखा धीरे धीरे बढ़ रहा था , यहाँ तक की कुँए भी सूखने लगे थे।
मनु की शादी हो चुकी थी, लेकिन उसकी संतान जन्म लेने से पहले ही दम तोड़ देती। शास्त्री जी ने अपने बेटे को शहर जाकर बसने के लिए कहा।
मनु शहर चला आया। वहा आकर उसके एक बेटा हुआ। जिसकी तबियत अक्सर खराब रहती।
एक दीन मनु को शास्त्री जी के मरने की खबर मिली , वह परिवार के साथ वापिस गाँव चला आया।
उनको मुखाग्नि देने के बाद वह वहीँ रुक गया और पिता की पदवी और काम काज सम्हालने लगा।
उसने देखा की गाँव में रहकर उसके बेटे की तबियत में सुधार है,
वह संतुष्ट था।
उसका बीटा अक्सर जब खेलने जाता कुछ फूल लता बड़े खुशबूदार होते थे वो।
एक दिन मनु ने पूँछ लिया आखिर तुम ये फूल लाते कहाँ से हो , हमारे यहाँ तो कोई ऐसा पौधा नहीं है।
मनु के बेटे ने जवाब दिया , पिताजी एक दिन जब में खेल रहा था तो बड़ी प्यारी खुशबू आयी ,उस महक का हुए मैं गाँव की सीमा तक पहुँच गया , वहाँ एक कुँए के आस-पास ये फूल उगे थे , पता है पिताजी कितने सुन्दर पौधे लगे हैं वहाँ, और जब भी मैं वहा जाता हूँ तो ऐसा लगता है वो मुझे देखकर खुश हो रहे हों।
मनु का माथा ठिनका , उसने तुरंत उस जगह जाने के लिए कहा।
जब मनु अपने बेटे को लेकर वहां पहुंचा तो स्तब्ध रह गया , ये वही कुआँ था जहां मोहिनी ने आत्महत्या की थी,उसके चारों तरफ बड़े सुंदर रजनीगंधा के फूल खिले थे। उसे लगा मानो वो फिरसे उसके सामने आगयी हो, जैसे सपनो में आती थी।
वह समझ गया मोहिनी आज भी वहीँ मौजूद है , और रजनीगंधा के फूलों में उसका प्यार आज भी बसा है।
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गगन टांकड़ा
(२००६)
शास्त्री जी बच्ची को बड़े गौर से देखते हैं ,उसके मस्तक की रेखाओं को देखकर वो कुछ गड़ना करने लगते हैं, ऐसा लगने लगता है जैसे वह किसी असमंजस में हो। अपनी गड़नाए पूरी करने के बाद वह गंभीर मुद्रा में आजाते हैं और बताते हैं की यह लड़की विनाश का साक्षात् रूप है।
यह पूरे गाँव के लिए विपत्ति का कारण बन सकती है, इसलिए इसका मरना ही उचित है, माँ बाप परेशां हो जाते है , घबरा जाते हैं रोने लगे हैं और शास्त्री जी से कोई उपाय निकालने के लिए कहते हैं।
शास्त्री जी सोचते हैं ,फिर बोलते हैं हाँ एक काम किया जा सकता है , इसे गाँव की सीमा से दूर ले जाया जाए , इसको इसकी शक्ल किसी को भी दिखाने की इजाजत नहीं है ,और जब ये थोड़ी बड़ी होजाए तो आने-जाने वालों को झरोखे से पानी पिलाया करे। इसे कभी गाँव के भीतर आने की इजाजत नहीं होगी।
मुखिया के आदेश का पालन हुआ , गाँव की सिमा के बहार झोपडी बना वो लोग रहने लगे।
समय बीता लड़की बड़ी हुई गाँव की शक्ल देखे हुए। वह १९ साल की हो चुकी थी , बहुत ही सुन्दर नैन-नक्श थे उसके ,उसका रूप ऐसा था की कोई भी उस मोह पाश में जकड जाए , लेकिन वो हमेशा चेहरा ढके ही रहती थी।
इन बीते वर्षों में गाँव ने भी खूब उन्नति कर ली थी , खुशहाली गाँव के हर घर में बस्ती थी।
सरपंच का एक लड़का था ,उसका बड़ा ही प्यारा नाम था "मनु " , मनु पढ़ने के लिए बाहर गया हुआ था। उसकी शिक्षा अब पूरी हो चुकी थी और वह अब वापिस गाँव के लिए आ रहा था , लेकिन उसने यह बात किसी को नहीं बताई सोचा सबको आश्चर्य हो जाएगा उसे देख कर। इसलिए मनु बिना बताए ही गाँव निकल लिया ,स्टेशन आकर उसने तांगा किया जो उसके गाँव से तीन किलोमीटर पहले बने कसबे तक छोड़ देने वाला था , लेकिन उससे आगे कोई जाने को तैयार न था क्यूंकि आगे का रास्ता उबड़-खाबड़ और रेतीला था, इतना अंदर गाँव में कोई नहीं जाता था।
तांगे ने उसे कसबे में छोड़ दिया जहाँ से आगे उसे अब अकेले ही जाना था।
वह सड़क किनारे बानी एक दुकान की कुर्सी पर बैठ गया , कचौरी चाय का नाश्ता कर ,घड़े से पानी पी लिया। और फिर अपनी मंजिल की ओर चल पड़ा , सर पर धूंप ,रेतीला रास्ता, और हाथ में बैग ,वो धीरे धीरे चल रहा था ,और अपनी बेवकूफी पर हंस रहा था।
सोच रहा था अगर बता देता की आ रहा हूँ तो पिताजी गांव से ही तांगा भिजवा देते ,यूँ गर्मी में तो नहीं मरना पड़ता,क्या पड़ी थी सबको चौंका देने की मुझे न जाने।
उसके गाँव की सीमा आ गयी वो थोड़ा खुश हुआ, लेकिन वो प्यास से तरस चूका था। उसने गाँव के बाहर बनी एक झोंपड़ी देखी , जहाँ उसे प्याऊ बना दिखा, उसने तुरंत प्याऊ की तरफ दौड़ लगाईं और पानी पिया। पानी पिने के बाद उसे कुछ अजीब महसूस हुआ और वो बेहोश हो गया।
इतनी गर्मी की वजह से उसे चक्कर आ गए थे। वह जमीं पर गिरा , बहार हुई आवाज को सुन मोहिनी बाहर निकली, उसने तुरंत मनु के मुहं पर पानी छिड़का, मनु कुछ होश में आया तो मोहिनी ने उसे अंदर चल कर बैठने के लिये कहा। मनु जैसे तैसे सम्हल कर अंदर गया और फिर अंदर बिछी खाट पर जा गिरा , धुप ने उसे निढाल कर दिया था।
कुछ देर बाद मनु को होश आया वो हिला उसे देख मोहिनी उठ खड़ी हुई और थोड़ा सा पानी लेकर मनु की और आई , मनु ने आंख खुलते ही उसकी और देखा और देखता ही रह गया , उसके मोहक चेहरे को देख वो बिलकुल स्तब्ध रह गया और थोड़ी देर उसे ही देखता रहा मानों उसपर वशीकरण हो गया हो, उसने मोहिनी के हाथ से पानी पिया, बैठा ,लेकिन उसे ही देखता रहा एकटक , मोहिनी की समझ में नहीं आ रहा था ये सब क्या है।
उसने पूछा आपकी तबियत ठीक है,कौन हैं आप ,और यहाँ कहाँ से आ रहे थे,
मनु कुछ देर रुककर बोला मैं मनु काम से यहां आया हूँ तुम कोण हो और यहाँ क्या कर रही हो?
मोहिनी ने अपने बारे में भी बताया ,की उसे गाँव में जाने की इजाजत नहीं है, उसको यहां पानी पिलाने का ही हुक्म है , इसलिए उसके माँ-बाप ने यहाँ झोपडी बना ली, आजकल खेतों में काम ज्यादा है तो दोनों वही खेतो पर रहे हैं, एक दो दिन में आते हैं।
मनु सब सुन रहा था ,काफी देर हो चुकी थी वो अब घर जाने के लिए उठा और ,अपने घर की तरफ चला।
जब वो घर पहुंचा तो हर कोई दंग रह गया , पूरे घर में खुशीओं की लहर उठ गयी। सबने खाना खाया और सोने के लिए चले गए , मनु को नींद नहीं आरही थी उसके चेहरे के आगे बार बार बस वही मनमोहक चेहरा आ रहा था , नींद आ भी गई तो ख्यालों में भी बस मोहिनी दिखाई दे रही थी रजनीगंधा के फूलों के साथ। वो लपक कर बैठ गया और सोचने लगा उसके साथ ये क्यू हो रहा है।
वह चाहकर भी उसके अपने दिमाग से नहीं निकल पा रहा था। सोते जागते बस मोहिनी के पास जाने का उसका मन कारने लगा।
एक दिन उसने मन बना लिया कि वो वापिस वहाँ जाएगा। सुबह गाँव देखने के बहाने वो निकला और उसकी झोपडी के पास पहुंच गया , पानी पिने के लिए झरोखे के पास आया। मोहिनी ने उसे पानी पिलाया ,वह बोला पहचानी मुझे , मैं वही हूँ जो उस दिन बेहोश हो गया था। वो बोली अच्छा अब आप ठीक हैं। यहाँ कैसे आए।
मनु बोला गुजर रहा था प्यास लगी तह तो बस आ गया। सुनो मुझे कुछ बात करनी है तुमसे क्या मैं अंदर आ सकता हूँ।
मोहिनी बोली मुझसे बात करनी है। कैसी बात ,मनु बोलै अंदर तो आने दो तभी बताऊंगा।
मोहिनी ने दरवाजा खोल दिया , उसने अंदर आते ही मोहिनी को देखा और फिर एकटक उसी को निहारता रहा। मोहिनी ने कई बार पूछा क्या काम है , वह नहीं बोला जब मोहिनी ने उसको हल्का सा हड़का कर पूछा तो वो बस इतना बोला "प्यास लगी थी बुझाने आगया "
मोहिनी बोली तो ये बात अंदर आकर करनी थी पानी तो पीला दिया मेने , मनु ने हिम्मत जुटाई और बोला पानी की प्यास नहीं ,तुम्हे देखने की प्यास,मैनें जिस दिन से तुम्हे देखा है , तुम्हारे ही ख्यालों में खोया रहता हूँ ,आज रहा ही नहीं गया तो तुम्हे देखने चला आया। देखो मुझे गलत मत समझना मैं पूरी रात तुम्हारे ही सपने देखता हूँ ,रजनीगंधा के फूल हाथों में लिए।
मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। मोहिनी को कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे ,इस तरह की बातें आजतक उससे किसी ने नहीं की थीं। वह तुनक कर बोली जाओ यहाँ से , मुझे इन लपेटो मे ना लो।
मनु चला गया लेकिन उसका मन नहीं माना वह किसी न किसी तरह रोज पानी पीने जाता और मोहिनी को मनाता। और मोहिनी रोज उसे बैरंग लौटा देती और उसे अपना चेहरा भी ना दिखाती जिससे मनु व्याकुल हो गया।
एक दिन उसने ठान लिया आज तो वो मोहिनी को मना कर ही रहेगा। कुछ दिन के लिए पडोस के गाँव में दोस्त से मिलने की कहकर मनु घर से निकला और सीधे प्याऊ पर जा पहुंचा और मोहिनी से बोला अगर आज तुमने हाँ नहीं की तो यहीं भूक प्यास से डैम तोड़ देगा।
और वो उसके झोपड़े के आगे बैठ गया दिन चढ़ने लगा गर्मी बढ़ने लगी हालात यह होगये की पानी भी भाप बन उड़ने लगा ,अब धूप मनु की सहन से बाहर हो गयी थी कुछ खाया पिया भी नहीं था , उसे चक्क्र आने लगे , और एक समय ऐसा भी आया जब वो बेसुध हो गिर पड़ा , उसके गिरने की आवाज आते ही मोहनी भागी और उसको गोद में लिटाकर पानी की छींट देने लगी , मनु को कुछ होश आया तो मोहिनी पानी पिने को कहा, मनु ने साफ इंकार करदिया और बोला अगर तुम मुझसे प्यार नहीं कारती तो क्यों आई , मरने दो मुझे वैसे भी तुम्हारे बगैर मैं नहीं जी सकता।
महिनी ने कहा अगर चाहती ना तो आती ही क्यूँ। अंदर आजाइये बाहर बहुत गर्मी है। मनु ने पानी पिया और अंदर आगया। अंदर आकर खाट पर बैठा और फिर लेट गया। मोहिनी , ने कुछ बनाया और इसे खाने के लिए कहा। मनु ने उसे अपने हाथों से खिलाने के लिए मना लिया। मोहिनी एक एक गस्सा खिलाती लेकिन मनु तो अपनी निगाहों की प्यास को बुझा रहा था। खाना ख़त्म होने तक वो महिनी को ही देखता रहा। खाना खाकर वो थोड़ी देर सुस्ताया और फिर मोहिनी से अपने मन की बातें करने लगा। मोहिनी भी उसकी बातों में खोने लगी थी। मनु ने मोका पाकर अपनी छुअन का एहसास मोहिनी को दिया , जिससे वो सिहर उठी , उसने मनु से ऐसा ना करने को कहा , मनु नहीं मना और उसने उसे अपनी बाजुओं में कैद कर लिया। मोहिनी अपने आप को समर्पित हो चुकी थी, मनु उसे पाने में सफल रहा।
रात हो चली थी , मोहिनी ने उसे घर वापिस जाने को कहा तो मनु ने बताया वह दो दिन के लिए बोलकर घर से निकला है। अबतो वह कल शाम को ही जाएगा। यह कहकर उसने फिरसे मोहिनी को बाजुओं में जकड़ लिया। सुबह हुई मनु को उसने घर में ही रहने को कहा अगर गाँव में से कोई देख लेगा तो उसकी बदनामी होगी। इस तरह से एक और दिन दोनों ने साथ बिताया।
रात्त हुई और मनु अपने घर की तरफ निकल लिया , उसने अपनी पहचान भी मोहिनी को बता दी थी। उसने जल्द आने का भी वदा किया।
समय ऐसे ही आगे बढ़ता रहा दोनों चोरी छिपे मिलते रहे, मनु की प्यास हर बार और बढ़ती जाती। उसने विचार कर लिया था की वह मौका पाते ही घरवालों से बात करलेगा और मोहिनी से शादी करेगा।
एक रोज वो मोहिनी के साथ झोंपड़े में था तभी मोहिनी के माँ बाप वहाँ आगये वह परिस्तिथि को समझ नहीं पाए और उन्होंने मनु से वहां से जाने को कहा और फिर कभी भी वहाँ मोहिनी से न मिलने को कहा , उन्होंने यह भी बता दिया की क्यूँ मोहिनी को गाँव से बाहर निकला गया वह शाप हे पूरे गाँव के लिये , लेकिन मनु कुछ समझने को राजी नहीं था। उसने अपनी माँ से बात की , माँ ने साफ साफ़ मना करदिया और बताया कि उसकी शादी की बात कहीं और से चल रहीं हैं , अब वो उस लड़की को भूल जाए तो अच्छा। मगर मनु सोते जागते बस मोहिनी के ही ख्वाब देखता। हाथ में रजनीगंधा के फूल लिए वह हमेशा उसकी प्यास को बढाती रहती लेकिन अब घर की बदनामी की वजह से वो मोहिनी से नहीं मिल पा रहा था।
एक रात मोहिनी सरपंच के घर आयी चुप-चाप उसने वहा काम करने वाले एक बच्चे से मनु को बुलाने के लिए कहा।
मनु दौड़ा दौड़ा आया और मोहिनी को बाँहों में भरकर चूमने लगा। मोहिनी ने उसे दूर किया और कहा मुझे सब पता लग गया है,तुम्हारी शादी किसी और से होने जा रही है ,मेरे पिता ने सब बताया और तुमसे मिलने को भी मना किया है। लेकिन एक बात जो मैं तुम्हे बताने आयी हूँ की मैं माँ बनाने वाली हूँ , मनु स्तब्ध था उसने अपनी तृष्णा को तृप्त करने में इस बात का कभी ख़याल ही नहीं किया। वह मोहिनी से बोला तुम कैसे भी इस बच्चे को गिरदो ताकि आगे का जीवन हम दोनों और हमारा परिवार बिना बदनामी के जी सके,यह कह कर वो अंदर चला गया।
मोहिनी पूरी तरह टूट चुकी थी , अँधेरी रात में उसने उसी कुँए में कूदकर जान देदी , जिससे वो पानी भरा करती थी। कुछ दिन बाद जब लोगों ने प्याऊ बंद पाया तो उसकी ढूंढ हुई , उसकी लाश कुएं में मिली। सबको यह बात पता लगी तो सबने इसे हादसा समझा,
लेकिन जब शास्त्री को पता लगा तो उसके होश ही उड़ गए ,उसे अपने गाँव का विनाश नजर आने लगा था ,जो भविष्यवाणी उसने की थी वह सच होने जा रही थी।
कुछ साल बीत गए थे। गाँव में सूखा धीरे धीरे बढ़ रहा था , यहाँ तक की कुँए भी सूखने लगे थे।
मनु की शादी हो चुकी थी, लेकिन उसकी संतान जन्म लेने से पहले ही दम तोड़ देती। शास्त्री जी ने अपने बेटे को शहर जाकर बसने के लिए कहा।
मनु शहर चला आया। वहा आकर उसके एक बेटा हुआ। जिसकी तबियत अक्सर खराब रहती।
एक दीन मनु को शास्त्री जी के मरने की खबर मिली , वह परिवार के साथ वापिस गाँव चला आया।
उनको मुखाग्नि देने के बाद वह वहीँ रुक गया और पिता की पदवी और काम काज सम्हालने लगा।
उसने देखा की गाँव में रहकर उसके बेटे की तबियत में सुधार है,
वह संतुष्ट था।
उसका बीटा अक्सर जब खेलने जाता कुछ फूल लता बड़े खुशबूदार होते थे वो।
एक दिन मनु ने पूँछ लिया आखिर तुम ये फूल लाते कहाँ से हो , हमारे यहाँ तो कोई ऐसा पौधा नहीं है।
मनु के बेटे ने जवाब दिया , पिताजी एक दिन जब में खेल रहा था तो बड़ी प्यारी खुशबू आयी ,उस महक का हुए मैं गाँव की सीमा तक पहुँच गया , वहाँ एक कुँए के आस-पास ये फूल उगे थे , पता है पिताजी कितने सुन्दर पौधे लगे हैं वहाँ, और जब भी मैं वहा जाता हूँ तो ऐसा लगता है वो मुझे देखकर खुश हो रहे हों।
मनु का माथा ठिनका , उसने तुरंत उस जगह जाने के लिए कहा।
जब मनु अपने बेटे को लेकर वहां पहुंचा तो स्तब्ध रह गया , ये वही कुआँ था जहां मोहिनी ने आत्महत्या की थी,उसके चारों तरफ बड़े सुंदर रजनीगंधा के फूल खिले थे। उसे लगा मानो वो फिरसे उसके सामने आगयी हो, जैसे सपनो में आती थी।
वह समझ गया मोहिनी आज भी वहीँ मौजूद है , और रजनीगंधा के फूलों में उसका प्यार आज भी बसा है।
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गगन टांकड़ा
(२००६)
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