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Monday, April 6, 2020

मोहोब्बत का जाल

 मोहोब्बत का जाल 

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मुशायरे रोज ही होते हैं इस शहर में 

सम्हल कर रहना तुम यहाँ 

बलाएं निगाहों से मोहोब्बत का जाल फेंककर 

मासूमों के दिलों से खेलती हैं। 


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गगन टांकड़ा 
(२४-०९-१६)

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