ये कुदरत भी बड़ा अजीब खेल खेलती है
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ये कुदरत भी बड़ा अजीब खेल खेलती है
मुझसे कुछ इस तरह.........
ये कुदरत भी बड़ा अजीब खेल खेलती है
मुझसे कुछ इस तरह.........
मौसम इश्क़ का लाती है
तुझे याद कर तड़पाने के लिए. .........
और फिर खुद ही मेरे अश्कों को..........
बारिश की बूंदों से दबा लेती हैं।
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गगन टांकड़ा
(२४०९-१६)
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