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Thursday, April 23, 2020

ना ही सो पाता हूँ


ना ही सो पाता हूँ
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ना ही सो पाता हूँ , ना ही जागता हूँ मैं अब रातों में.......... 

तेरी रुसवाई मुझे सोने नहीं देती ,

और इस रंगीन मौसम में 

ये दिल तेरी यादों के संग ही सोने की जिद करता है। 
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गगन टांकड़ा 
(२४-०९-१६)

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