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Wednesday, April 29, 2020

अब यूँ भी चुप ना रहो


अब यूँ भी चुप ना रहो
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अब यूँ भी चुप ना रहो
 कुछ आज बोल दो 
जो छुपा हे कहीं दिल में
 वो राज खोल दो 
कर न सको जो इकरार
 मोहब्बत का यूँ जुबां से 
तो बस फिजा में चाहत के
 एहसास घोल दो 
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गगन टांकड़ा 
(३१-१२-२०१६)

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