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Wednesday, April 29, 2020

जो पूरे चाँद की रौशनी


जो पूरे चाँद की रौशनी
⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹



जो पूरे चाँद की रौशनी उतर आई है 
मेरे आशियाने में। 
रोशन फिर से कर गयी उन यादों को जो 
ढल गयी थी इस वीराने में। 

⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹⇹

गगन टांकड़ा 
(१५-११-२०१६)

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