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बारिश जो बरसे सुबह बूंदों में
तो भीगने का क्या फायदा
सुबह की पहली खिली कली से
जो ना आए तेरी महक
तो सूंघने का क्या फायदा
चिड़ियों की चहक में
जो ना हो तेरी हंसी
तो उन्हे सुनने में क्या फायदा
मेरी हर सांस में
जो तेरी यादें ना हो बसी
तो ऐसे जीवन को जीने का क्या फायदा
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गगन टांकड़ा
(२२-०६-२०१७)

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