खेलते देखा उन्हें एक खेल तक़दीर का
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खेलते देखा उन्हें एक खेल तक़दीर का
समझ न आया कि कौन खेल रहा है।
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गगन टांकड़ा
(२४-०३-२०१७)
नोट: इंसान कई बार दिमाग में इतने ख़याल बन लेता है की वो खुद उसमें ही उलझता रहता है,और ऐसा वक़्त भी आजाता है जब विवेक जड़ होजाता है और इंसान अपने ही बनाए जाल में जकड़ जाता है।

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