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Thursday, September 26, 2019

.......तृप्त हो जाएंगी तृष्णाएँ .....

"जिया हूँ जिंदगी बस तेरी  (खुदा ) ही शर्तों पर 

क्यूँ न आज एकख्वाहिश  करूँ 

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तुझे (खुदा )क्युं  लगा आज खता हुई 

क्या मेरी वफ़ाए (बंदगी)भी तुझे याद नहीं 

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कबूल होगी तेरी (खुदा )हर सजा 

बस एक बार जो वो  (मोहोब्बत )मिलें 

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चाहत बस इतनी हे 

कि  निगाहों को उनका दीदार मिले 

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जो बस पानी पर भी उनका (मोहोब्बत )अक्स पड़े "
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-:गगन टांकड़ा :-
(२२/०७/१३)

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