अगर गुनाह तुझसे मोहोब्बत करना
जो की है मैने
बता में क्या करूं
ना कहा ना चूमा हाथों को
इजहार किया सिर्फ निगाहों से
बता मेँ क्या करुँ
तड़पता हूँ तन्हाई में रोज
समझ नहीं आता जियूं या मरू
बता में क्या करू
:गगन टांकड़ा:
(३१/०१/१४)
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