"तुझसे नफरत करने की कोशिश
हजार की है
जब भी चलता हूँ सड़कों पर
मुझे मेरी जगह तेरी ही परछाई दिखी है
अब तू ही बता
कि में तुझे कैसे भूल पाउँगा
साथ तो तेरा हो न सका
तेरे बिन तन्हा भी न रह पाउँगा "
"गगन टांकडा "
{२४/०६/२०१३}
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