शिकवे शिकायतें होती रहेंगी रातभर
"रूठना मनाना चलता रहेगा रात भर
इन रातों में तो रोज आते हो तुम
मगर आज मिले हो हक़ीक़त में
कुछ पलों क लिए ....
जी --भर के देख लेना चाहता हूँ
आपके इस नूर को
न जाने कब होगा फिर दीदार इस तरह......."
:गगन टांकड़ा :
{०७/१०/२०१३}
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