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Friday, May 1, 2020

पिघला दो इस पत्थर को


पिघला दो इस पत्थर को
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पिघला दो इस पत्थर को ,अपने लबों की छुअन से।  
न जाने कितनी सदियों से, ये दिल नहीं धड़का है।।

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गगन टांकड़ा 
(१३-०२-२०१७)

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