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Thursday, May 7, 2020

दिल करता है बांके बंजारा निकलूं


दिल करता है बांके बंजारा निकलूं 
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दिल करता है, बनके बंजारा निकलूं 
  पीछे हर बात छोड़ के। 

आज फिर निकली है, सुबह हसीन 
घटाओं की चादर ओढ़ के। 


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गगन टांकड़ा 
(०३-०७-२०१७)

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